Unseen Desire
Unseen Desire मुंबई की चमकती रातों में एक ऐसी भूल हुई, जिसका चेहरा कभी देखा ही नहीं गया… एक अनजान रात, नशे में डूबे दो अजनबी, और एक ऐसी नज़दीकी जिसने किस्मत की दिशा बदल दी। Adhira Atre उस सुबह डर के साथ भाग गई—बिना पीछे देखे, बिना सच जाने। और Vedant Kapoor उस रात को ढूँढता रह गया… एक सवाल की तरह, एक जुनून की तरह। जब Vedant को पता चलता है कि वही लड़की किसी और की होने जा रही है—उसकी दुनिया हिल जाती है। ग़ुस्सा, अधिकार और अधूरा जुनून उसे वहाँ ले जाता है, जहाँ प्यार नहीं—सिर्फ़ ज़बरदस्ती है। एक अपहरण। एक जबरन शादी। और एक रिश्ता, जिसमें न भरोसा है… न रज़ामंदी। क्या वो रात सच में एक भूल थी? या वो चाहत थी जो कभी दिखाई ही नहीं दी—Unseen Desire? जब सच्चाइयाँ सामने आएँगी, तब सवाल ये नहीं होगा कि वो साथ रहेंगे या नहीं… सवाल ये होगा— क्या कुछ ज़ख़्म प्यार बन सकते हैं, या वो हमेशा क़ैद ही रहते हैं?

