
मुंबई की चमकती रातें अब और गहरी हो रही थीं। बॉलरूम का संगीत अभी भी कानों में गूंज रहा था, लेकिन वेदांत कपूर उस सबसे दूर था। वह अपने ही अंदर के दानवों में खोया हुआ था। वह बॉलरूम के एक शांत कोने में अकेला बैठा था, अपने विचारों में डूबा हुआ। वह धीरे-धीरे शराब पी रहा था, अपने दर्द को भूलने की कोशिश में। उसका नाम वेदांत कपूर था, और उसके आसपास एक ताकतवर आभा थी - जैसे कोई ऐसा व्यक्ति हो जो सब कुछ कंट्रोल करता हो। 30 साल के वेदांत मुंबई के रियल एस्टेट टाइकून और नाइटलाइफ के बड़े निवेशक थे। शहर के एलिट सर्कल में उसकी ऊँची-ऊँची इमारतें और फैंसी क्लब थे। लोग उसे एक ताकतवर आदमी के रूप में जानते थे जो हमेशा कंट्रोल में रहता था।
वेदांत सुंदर लेकिन थका हुआ दिख रहा था। उसकी जबड़े की रेखा तेज थी, चेहरे पर हल्की सी दाढ़ी जो उसे रफ और आकर्षक बना रही थी। उसकी आँखें भेदने वाली थीं, जैसे किसी के भी अंदर झांक सकती हों। लेकिन आज रात, उन आँखों में सिर्फ खालीपन और दर्द दिख रहा था। उसने काले रंग का सूट पहन रखा था, लेकिन ब्लेजर थोड़ा ढीला था, और शर्ट के ऊपर के बटन खुले हुए थे। उसके हाथ में आधा खाली व्हिस्की का गिलास था। वह धीरे-धीरे घूंट ले रहा था, शराब की तेज गर्मी को गले से नीचे उतरते हुए महसूस कर रहा था।
वेदांत ने अपने मन में सोचा "सब कुछ इतनी जल्दी बेमानी क्यों लगता है... लोग हमेशा क्यों चले जाते हैं... कोई मुझे रोक क्यों नहीं सकता?"
उसका दिमाग दुखद यादों से भरा हुआ था। उसके माता-पिता का एक बुरे हादसे में निधन हो गया था जब वह छोटा था। उसके बाद, वह अकेले बड़ा हुआ और अपना बड़ा साम्राज्य खुद ही बनाया। वह अमीर और सफल हो गया, लेकिन अंदर से, वह भावनात्मक रूप से आहत था। वह कंट्रोल फ्रीक था, उसे हर चीज पर ताकत रखना पसंद था। लेकिन उसकी सबसे बड़ी कमजोरी जुनून और छोड़े जाने का डर था। अगर उसे कोई चीज या कोई व्यक्ति पसंद आता, तो वह उसे पूरी तरह से अपना बनाना चाहता था। हारने का ख्याल उसे पागल कर देता था।
"आज रात... आज रात शायद कुछ ध्यान भटकाने वाला मिल जाए। या शायद मैं और भी टूट जाऊँगा," उसने अपने मन में फुसफुसाया। इन्हीं विचारों में खोया हुआ, वेदांत बॉलरूम के किनारे की ओर चल पड़ा। तभी उसकी नजर एक लड़की पर पड़ी जो सपने से आई हुई लग रही थी।
उसी समय, वापस डांस फ्लोर पर, अधीरा और मेहर अभी भी मस्ती कर रही थीं। मेहर एनर्जी से भरी हुई थी, हँस रही थी और अधीरा को और डांस करने के लिए खींच रही थी। मेहर बोली "चलो, अधीरा! देखो वो लड़के अभी भी तुझे देख रहे हैं। चलो हाय कहते हैं - शायद थोड़ी फ्लर्टिंग करें।"
अधीरा हँसी और सिर हिलाया। वो बोली "नहीं, मेहर, मैं यहाँ ठीक हूँ। बस थोड़ा और डांस करते हैं, फिर घर चलते हैं।"
लेकिन अंदर से, उसे थोड़ी बेचैनी महसूस हो रही थी। बार वाले वो दोनों लड़के अब और करीब आ गए थे। उनकी मुस्कानें गलत लग रही थीं, जैसे उनकी कोई बुरी योजना हो।
एक लड़का, जिसके छोटे बाल और कैजुअल शर्ट थी, अधीरा के पास आया और उसे ड्रिंक ऑफर की। वो बोला "हे, ये ड्रिंक लोगी? ये स्पेशल है - ये पार्टी को और भी बेहतर बना देगी।"
अधीरा ने झिझकते हुए ले लिया। वो बोली "थैंक्स... लेकिन मैं ज्यादा नहीं पीती।"
उसने एक घूंट लिया, यह नहीं जानते हुए कि लड़कों ने उसमें कुछ बुरा मिला दिया था। यह एक ऐसी दवा थी जो शरीर को अंतरंगता चाहने लगाती और नियंत्रण खो देती थी। उनकी योजना साफ थी अधीरा को बेवकूफ बनाना और उसे ऐसी चीज में मजबूर करना जो वह नहीं चाहती थी।
सिर्फ कुछ ही मिनटों में, अधीरा को चक्कर आने लगा। उसकी आँखें धुंधली हो गईं, और शरीर में एक अजीब सी गर्मी फैलने लगी। अधीरा ने कमजोर आवाज में कहा "मेहर... मुझे लगता है कुछ गलत हो रहा है। मेरा सिर घूम रहा है। "
मेहर मुड़ी, लेकिन उसी पल एक दोस्त ने उसे दूसरी तरफ खींच लिया। वो बोली "एक सेकंड रुक, अधीरा! मैं अभी आती हूँ!" मेहर दूसरे कोने में चली गई, और अधीरा अकेली रह गई।
उसने मुश्किल से डांस फ्लोर से दूर जाने की कोशिश की। उसने खुद से कहा "मैं... मैं बाथरूम जाऊँगी... बस आराम चाहिय।" लेकिन उसके कदम डगमगा रहे थे, और दुनिया उसके चारों ओर घूम रही थी।
वह होटल के कॉरिडोर में पहुँच गई - एक लंबी, धुंधली रोशनी वाली गलियारा जहाँ पार्टी की आवाजें हल्की थीं। अधीरा ने सहारे के लिए दीवार पकड़ी और धीरे-धीरे चलने लगी। लेकिन उसका शरीर कमजोर होता जा रहा था। अचानक, वो दोनों लड़के उसके पास आ गए। "हे, तुम ठीक हो? चलो, हम तुम्हें एक सुरक्षित कमरे में ले चलते हैं," एक ने चिढ़ाती हुई मुस्कान के साथ कहा, उसकी कमर पर हाथ रखते हुए।
दूसरा लड़का हँसा। वो बोला "हाँ, हम मदद कर सकते हैं। इतनी सुंदर लड़की अकेली नहीं रह सकती। हमारा कमरा पास है। तुम वहाँ आराम कर सकती हो।" उनकी आँखों में लालच झलक रहा था, और वे उसे एक कमरे की तरफ खींचने लगे। अधीरा ने कमजोरी से हाथ हिलाया।
"नहीं... मुझे छोड़ दो... मेहर...," लेकिन उसकी आवाज बहुत धीमी थी, और दवा ने लड़ने में मुश्किल कर दी थी।
तभी, वेदांत कॉरिडोर के किनारे खड़ा था। वह अपना ड्रिंक खत्म करने के बाद अपने कमरे में वापस जा रहा था। उसकी नजर उस दृश्य पर पड़ी - दो लड़के, अधीरा की कमजोर हालत, उनकी बुरी नीयत। वेदांत ने सोचा "ये कौन हैं...? ये इसके साथ क्या कर रहे हैं? यह खतरे में है। "
अपने सिस्टम में शराब होने के बावजूद, उसकी ताकतवर पर्सनालिटी जाग गई। वह तेजी से उनकी तरफ बढ़ा। वो बोला "एक्सक्यूज़ मी? तुम क्या कर रहे हो?" उसकी आवाज गहरी और अथॉरिटी से भरी थी, जैसे कोई आदेश हो।
दोनों लड़के वेदांत को देखकर झटके से रह गए उसकी लंबी कद-काठी, उसकी ताकतवर आभा, उसकी गुस्से से भरी आँखें। एक ने झूठ बोला "त-तुम कौन हो? यह हमारी दोस्त है। "
वेदांत ने ठंडी मुस्कान दी, लेकिन उसकी आँखें गुस्से से जल रही थीं। वो बोला "दोस्त? ऐसा नहीं लगता। इसे छोड़ दो, नहीं तो मैं होटल सिक्योरिटी बुला लूंगा। या... मैं खुद ही संभाल लूंगा।"
उसका टोन इतना दबंग था कि लड़के पीछे हट गए और भाग गए। "सॉरी, भाई, गलती हो गई," वे कहते हुए गायब हो गए।
अधीरा गिरने ही वाली थी। उसकी आँखें बंद हो रही थीं, शरीर कमजोर था। वेदांत ने तुरंत उसका हाथ पकड़ लिया। "तुम... तुम ठीक हो?" उसने अपनी गहरी आवाज में पूछा, उसे गिरने से रोकते हुए।
अधीरा ने धुंधली नजर से उसे देखा। वो बोली "मैं... हाँ... शायद..." उसे अपने दिल की धड़कन तेज महसूस हुई, डर और दवा से आई कुछ अजीब सी भावना का मिला-जुला एहसास।
वेदांत, भले ही वह शराब के नशे में था, उसे उठा लिया। उसके शरीर का वजन और उसकी नाजुक हालत ने उसके नियंत्रण को चुनौती दी, लेकिन उसने आसानी से उसे थाम लिया। वो बोला "यह इतनी नाजुक है... इतनी परफेक्ट... और यह नशा... यह मुझे कंट्रोल खोने पर मजबूर कर रहा है," उसने सोचा। वह उसे पास के अपने कमरे में ले गया। दरवाजा खुला तो एक लक्ज़रियस जगह दिखी - एक बड़ा बिस्तर, धुंधली लाइटें, और खिड़की से मुंबई का नज़ारा।
अंदर, अधीरा ने कहा, "मैं... बाथरूम... प्लीज।"
वह लड़खड़ाते हुए बाथरूम की तरफ बढ़ी। वेदांत बाहर इंतज़ार करने लगा। अंदर, अधीरा ने पानी से चेहरा धोने की कोशिश की, लेकिन उसकी ड्रेस गीली हो गई और थोड़ी सरक गई। ऑफ-शोल्डर ड्रेस अब नम थी। वह बाहर आई, उसका शरीर कांप रहा था। "सॉरी... मैं...," उसने शुरू किया, लेकिन उसकी आँखें वेदांत की आँखों से मिल गईं।
वेदांत उसे देखकर जम गया। शराब, उसकी गीली ड्रेस, उसकी कमजोर आँखें - सब कुछ मिलकर उसे कंट्रोल खोने पर मजबूर कर रहा था। "तुम... तुम क्या कर रही हो?" उसने फुसफुसाया, लेकिन उसके टोन में नियंत्रण और जुनून मिला हुआ था।
वह करीब आया, उसके हाथ को पकड़ते हुए। "तुम इतनी नाजुक हो... और फिर भी... मेरे लिए खुद को रोकना मुश्किल हो रहा है।"
अधीरा का दिल और तेजी से धड़कने लगा। दवा ने उसे इच्छा महसूस कराई, लेकिन वह डरी हुई भी थी। उसने कमजोर स्वर में कहा, "तुम... तुम कौन हो? मुझे... घर जाना है।"
पीछे हटने की कोशिश करते हुए। लेकिन वेदांत धीरे-धीरे और करीब आया।
"मैं वेदांत हूँ... और तुम? तुम्हें घर जाने की जरूरत नहीं है। तुम यहाँ सुरक्षित हो... मेरे साथ," उसने कहा, उसकी आवाज में कब्जे का भाव था। उसने हल्के से उसके बालों को छुआ। "देखो, बाहर खतरा है। यहीं रहो... मेरे पास।"
अधीरा के गाल लाल हो गए, उसका शरीर गर्म महसूस होने लगा।
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